Learn Goat Farming from Basics to Advance Level

बकरी पालन ही क्यों?

बकरी एक बहुद्देश्यीय पशु है जो भूमिहीनों, लघु व सीमान्त किसानों की अर्थ व्यवस्था तथा पोषण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। हमारे देश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की जनसंख्या करीब 45 करोड़ है। जिनका जीवन बहुत ही निम्न स्तर का है। उनका जीवन स्तर आसानी से ऊँचा करने के लिए बकरी पालन सर्वोत्तम उद्यम है। इस व्यवसाय में बहुत अधिक तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसमें लाभ देने की अधिक क्षमता है। बकरी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें अधिकांश ग्रामीण लोग करते हैं। बकरी को उपलब्ध झाड़ियों और पेड़ों, वृक्षों पर अच्छी तरह से पाली जा सकती है। इसे विपरीत वातावरण में अच्छी तरह से पाला जा सकता है। जहाँ अन्य फसल नहीं उगाई जा सकती है। खेती के साथ बकरी एक अतिरिक्त आय के साधन के रूप में भी पाली जाती है। जहाँ जमीन अधिक उपजाऊ नहीं होती और नकदी फसलों की खेती नहीं की जा सकती है। वहाँ बकरी पालन एक उत्तम विकल्प होता है,

क्योंकि इस पशु को सीमित चरागाह संसाधनों में भी आसानी से पाला जा सकता है और उपलब्ध सीमित चारा संसाधनों को उपभोग करके एक अच्छी पूँजी बन जाती है। इसे समय-सयम पर विक्रय कर अपना परिवारीय जरूरत को पूरा किया जा सकता है। बकरी को बेचने में कभी भी कहीं भी कोई समस्या नहीं आती है। यह प्राकृतिक आपदा के समय बीमा का काम करती है। जब सारी फसल नष्ट हो जाती है तब बकरी ही सहारा देती है। बकरी को धार्मिक रस्म तथा सामाजिक ऋण उतारने के लिए प्रयोग में लाते हैं। किसान अधिकतर एक फसली प्रणाली को अपनाकर खेती करते हैं इसमें अपनी सारी पूँजी व साहूकार से उधार लेकर उस फसल में लगा देते हैं, लेकिन कई बार प्राकृतिक आपदा, फसल का उचित मूल्य न मिलना आदि कारण से किसान की पूरी आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है। इसलिए भारत सरकार कृषि के विविधी करण पर जोर दे रही हैं, जिसमें किसान फसल के साथ-साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, मशरूम उत्पादन, बकरी पालन आदि उद्यमों में से दो या दो से अधिक व्यवसाय करने के लिए जोर दे रही है। क्योंकि यदि उद्यम में किसी तरह से हानि होती है तो दूसरा-तीसरा उद्यम किसान को मदद करता है